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चैत्र नवरात्रि 2025 का छठा दिन – माँ कात्यायनी की पूजा, महत्व और शुभ मुहूर्त

नवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। चैत्र नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है। माँ कात्यायनी देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं, जो भक्तों को शक्ति, साहस और विजय प्रदान करती हैं। इस लेख में हम माँ कात्यायनी की पूजा विधि, उनके स्वरूप, महत्व और चैत्र नवरात्रि 2025 के छठे दिन के शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानेंगे।

 

चैत्र नवरात्रि 2025 के छठे दिन का शुभ मुहूर्त

 

चैत्र नवरात्रि 2025 का छठा दिन 3 अप्रैल 2025, बृहस्पतिवार को पड़ रहा है। इस दिन माँ कात्यायनी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:

 

प्रदोष काल (शुभ मुहूर्त): शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक 

 

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:40 बजे तक 

 

चंद्रोदय समय: रात 9:15 बजे के बाद 

 

इन समयों में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

 

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा

 

नवरात्रि के छठे दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है। इनके जन्म या प्रकट होने के बारे में वामन और स्कंद पुराण में अलग-अलग बातें बताई गई हैं। माँ कात्यायनी देवी दुर्गा का ही छठा रूप है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि देवी के कात्यायनी रूप का जन्म भगवान के स्वाभाविक गुस्से से हुआ था। वहीं वामन पुराण के अनुसार सभी देवताओं ने अपनी शक्ति को बाहर निकालकर कात्यायन ऋषि के आश्रम में जमा किया और कात्यायन ऋषि ने उस शक्ति के ढेर को एक देवी का रूप दिया, जो देवी पार्वती द्वारा दिए गए सिंह (शेर) पर बैठी थी। कात्यायन ऋषि ने रूप दिया इसलिए वह देवी कात्यायनी कहलाईं और उन्होंने ही महिषासुर को मारा।

 

माँ कात्यायनी का स्वरूप

 

माता कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य, चमकीला और प्रकाशमान है। माता की चार भुजाएं हैं। माताजी के दाहिने ओर का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुसज्जित है। माता जी का वाहन सिंह है।

 

माँ कात्यायनी की पूजा विधि और मंत्र

 

माता कात्यायनी की पूजा प्रदोषकाल यानी गोधूली बेला में करना श्रेष्ठ माना गया है। शैलपुत्री सहित अन्य देवियों की तरह इनकी भी पूजा की जाती है। इनकी पूजा में शहद का प्रयोग जरूर किया जाना चाहिए, क्योंकि माँ को शहद बहुत पसंद है। शहद युक्त पान का भोग भी देवी कात्यायिनी को लगता है। देवी कात्यायनी की पूजा में लाल रंग के कपड़ों का भी बहुत महत्व है।

 

पूजा की विधि:

 

1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 

 

2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। 

 

3. लाल रंग के आसन पर माँ कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। 

 

4. दीपक जलाकर, फूल, अक्षत, रोली और धूप से पूजा करें। 

 

5. शहद, पान और मिठाई का भोग लगाएं। 

 

6. निम्न मंत्र का जाप करें:

 

माँ कात्यायनी का मंत्र:

 

"चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। 

कात्यायनी च शुभदा देवी दानवघातिनी॥"

 

इस मंत्र का 108 बार जाप करने से माँ कात्यायनी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को विजय, साहस और सुख प्रदान करती हैं।

 

माँ कात्यायनी की पूजा का महत्व

 

देवी कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों में ताकत आती है और वे उनकी कृपा से अपने दुश्मनों को हराने में सक्षम हो जाते हैं। इनकी पूजा से हर प्रकार की मुसीबतें दूर हो जाती हैं। माँ कात्यायनी की पूजा से अविवाहित कन्याओं की शादी के अवसर बनते हैं और अच्छा वर भी मिलता है। देवी कात्यायनी की पूजा से बीमारी, दुःख, चिंता, डर आदि खत्म हो जाते हैं। देवी कात्यायनी की पूजा करने से हर तरह का डर भी दूर हो जाता है।

 

निष्कर्ष

 

माँ कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है, जो भक्तों को शक्ति, साहस और विजय प्रदान करती हैं। इनकी पूजा से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। चैत्र नवरात्रि 2025 में 3 अप्रैल को माँ कात्यायनी की पूजा करके भक्त उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

 

देवी माँ कात्यायनी से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

 

1. माँ कात्यायनी का पूजन किस दिन किया जाएगा?

 

माँ कात्यायनी का पूजन चैत्र नवरात्रि 2025 का छठा दिन 3 अप्रैल 2025, बृहस्पतिवार के दिन पड़ रहा है।

 

2. माँ कात्यायनी को किसका भोग लगाया जाता है?

 

माँ कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए क्योंकि देवी को शहद सबसे प्रिय है।

 

3. माँ कात्यायनी को सबसे प्रिय कौन सा रंग है?

 

देवी कात्यायनी को सबसे प्रिय लाल रंग है।

 

4. माँ कात्यायनी का वाहन कौन सा है?

 

देवी कात्यायनी का वाहन सिंह है।

 

5. माँ कात्यायनी की पूजा का क्या महत्व है?

 

माँ कात्यायनी की पूजा करने से अविवाहित कन्याओं की शादी के अवसर बनते हैं और उनकी शादी जल्द से जल्द होती है।

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