नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जिसमें नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व है। इस वर्ष 31 मार्च 2025 को माँ चंद्रघंटा की उपासना की जाएगी। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि 2025: तीसरे दिन का शुभ मुहूर्त
● तिथि: 31 मार्च 2025 (सोमवार)
● पूजा का श्रेष्ठ समय: प्रातः 6:30 बजे से 8:00 बजे तक
● अभिजित मुहूर्त: 11:54 AM से 12:45 PM (सर्वोत्तम पूजा काल)
● राहुकाल: 3:00 PM से 4:30 PM (इस अवधि में पूजा न करें)
विशेष नोट: इस वर्ष तृतीया तिथि क्षय होने के कारण माँ ब्रह्मचारिणी और माँ चंद्रघंटा की पूजा एक ही दिन (31 मार्च) को की जाएगी।
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप
माँ चंद्रघंटा का नामकरण उनके मस्तक पर विराजमान अर्धचंद्राकार घंटे के कारण हुआ है। यह घंटा दिव्य ध्वनि उत्पन्न करता है जो नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है। माँ का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और भव्य है:
● वह सिंह पर आरूढ़ हैं।
● उनके दस हाथ हैं जिनमें विभिन्न शस्त्र सुशोभित हैं।
● उनके हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष-बाण, कमल आदि दिखाई देते हैं।
● वह अभय और वरद मुद्रा में हैं जो भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
● उनका प्रिय रंग लाल या हल्का पीला है जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है।
माँ चंद्रघंटा पूजा का महत्व
1. मानसिक शांति: इनकी उपासना से मन की अशांति दूर होती है और आंतरिक शक्ति का विकास होता है।
2. साहस में वृद्धि: भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है और जीवन संघर्षों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
3. वैवाहिक सुख: कुंवारी कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है और विवाहित स्त्रियों का दांपत्य जीवन सुखमय बनता है।
4. आध्यात्मिक उन्नति: ध्यान और साधना में सफलता मिलती है, कुंडलिनी जागरण में सहायता मिलती है।
5. सुरक्षा कवच: माँ चंद्रघंटा की कृपा से भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से सुरक्षा प्राप्त होती है।
पूजन सामग्री
माँ चंद्रघंटा की पूजा हेतु निम्नलिखित सामग्री तैयार करें: माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा/तस्वीर, सफेद या पीले रंग का वस्त्र, फूल (सफेद या पीले रंग के), अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, घी, नारियल, फल, मिठाई, जौ बोने हेतु मिट्टी का पात्र और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
विस्तृत पूजा विधि
आइए जानते हैं माँ चंद्रघंटा की विस्तृत पूजन विधि:
● प्रातःकाल स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा को विधिवत स्थापित करें।
● ध्यान एवं आवाहन: "ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः" मंत्र का उच्चारण करते हुए माँ का ध्यान करें और उन्हें आमंत्रित करें।
● मंत्र जप: निम्न मंत्र का 108 बार जप करें: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः"
● कथा श्रवण: माँ चंद्रघंटा से संबंधित कथा सुनें या पढ़ें।
● आरती: "जय चंद्रघंटा माता, मैया जय चंद्रघंटा..." इस आरती को भक्तिभाव से गाएं।
● प्रसाद वितरण: पूजा में प्रयुक्त नैवेद्य को प्रसाद रूप में वितरित करें।
माँ चंद्रघंटा की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार, माँ चंद्रघंटा ने महिषासुर के अनेक राक्षस सेनापतियों का संहार किया था। एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ तब माँ ने इसी रूप में देवताओं की रक्षा की थी। उनके मस्तक पर विराजमान चंद्रघंटा से निकलने वाली दिव्य ध्वनि ने समस्त दैत्यों को भयभीत कर दिया था।
उपासना के विशेष लाभ
देवी की उपासना से कई तरह के लाभ मिलते हैं जैसे कि -
● मानसिक तनाव और चिंता से मुक्ति
● शत्रुओं पर विजय प्राप्ति
● आत्मविश्वास में वृद्धि
● कुंडलिनी जागरण में सहायता
● नकारात्मक ऊर्जा का नाश
● शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य लाभ
● जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता
निष्कर्ष
चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन श्रद्धापूर्वक माँ की पूजा करने से भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति और सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। 31 मार्च 2025 को प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में माँ चंद्रघंटा की विधिवत पूजा अवश्य करें। माँ की कृपा से आपके सभी कष्ट दूर होंगे और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. माँ चंद्रघंटा का नाम कैसे पड़ा?
माँ के माथे पर घंटे के आकार का चंद्रमा विराजमान है, इसीलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
2. माँ चंद्रघंटा की पूजा में कौन सा रंग शुभ है?
लाल या हल्का पीला रंग विशेष शुभ माना जाता है।
3. क्या राहुकाल में पूजा कर सकते हैं?
नहीं, राहुकाल (3:00 PM से 4:30 PM) में पूजा वर्जित है।
4. माँ चंद्रघंटा की पूजा का मुख्य मंत्र क्या है?
"ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः" मुख्य मंत्र है।
5. इस पूजा से क्या विशेष लाभ मिलता है?
मानसिक शांति, शत्रु पर विजय, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।